Positive Thought of Anmol Vachan (अनमोल वचन) Motivation Thoughts

Positive Thought of Anmol Vachan (अनमोल वचन) Motivation Thoughts

एक दिन
बड़े सवेरे
सूरज को इक्षा हुई
कि उसे भी अपनी परछाई देखनी है
छोटी मोटी हिलती डोलती ही सही

देख जो लिया था उसने
बस स्टॉप पर
बच्चों को परछाई से खेलते
जो उनके पैरों से हमेशा जुड़ी रहती

किसी से जुड़े रहने की ललक में
वह कभी बादलों के पीछे जाता
कभी धरती और चाँद से आग्रह करता
पर परछाईं का कोई तरीका न सूझता उसे

जो पूरी दुनिया की परछाई
का स्रोत है
उसे खुद की परछाई का स्रोत नहीं मिला

इसलिए अंत में हार कर
वह छोड़ता है यह दायित्व कवि पर
कि बना के दिखाए सूरज की परछाई
ऐसे तो बड़ी डींगे हाँकता है कवि

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किसी से कोई तुलना नहीं
 हम जैसे हैं बेहतर है..!!

अकाल हो अगर अनाज का,
    तब मानव मरता है.
          किन्तु
अकाल हो अगर संस्कारों का,
     तो मानवता मरती है!

संस्कारों से बड़ी कोई वसीयत नहीं
        और ईमानदारी से
   बड़ी कोई विरासत नहीं !!

ख़याल हूँ, जुनून हूँ, नफ़रत हूँ, प्यार हूँ या गुरूर हूँ 
शर्म हूँ, याद हूँ, फ़ितरत हूँ आदत हूँ या भूल हूँ, 
जो भी हूँ,
बस मैं फरेब नही हूँ !

ज़रा-सा तुमसे क्या आगे बढ़ा हूँ,
तुम्हारी आँख में चुभने लगा हूँ ? 
तुम्हारे क़द से क़द कुछ कम है मेरा,
तुम्हारी सोच से लेकिन बड़ा हूँ !


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किसी को गीता में ज्ञान ना मिला,
किसी को क़ुरान में ईमान ना मिला,
उस बंदे को आसमान में रब क्या मिलेगा,
जिसे इंसान में इंसान ना मिला !


हमारे जीवन की सभी समस्याओ की वजह 
सिर्फ दो शब्द हे

"जल्दी" और "देर"

हम सपने बहुत जल्दी देखते हैं ..
और कार्य बहुत देरी से करते हैं।

हम भरोसा बहुत जल्दी करते हैं ..
और माफ करने मे बहुत देर करते हैं।

हम गुस्सा बहुत जल्दी करते हैं ..
और माफी बहुत देर से माँगते हैं।

हम हार बहुत जल्दी मानते हैं ..
और शुरुआत करने मे बहुत देर करते हैं।

हम रोने मे बहुत जल्दी करते हैं ..
और मुस्कुराने मे बहुत देर करते हैं।

बदलें “जल्दी” वरना
बहुत “देर” हो जाएगी.

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