About This Poetry:- "Main" Sushant Singh Rajput for G Talks is performed by Amritesh Jha and also written by him.

Main Sushant Singh Rajput | Amritesh Jha | Poetry | G Talks


"Main" Sushant Singh Rajput


मैं सुशांत सुशांत सिंह राजपूत
मेरे मरने पर तुम्हें तकलीफ हो रही है
मेरे जीने से तुम्हें खुशी थी क्या
तुम में से हर कोई मेरा कातिल है
तुम्हारे हिसाब से यह खुद खुशी थी क्या
मेरे बारे में आज इतना लिख रहे हो
कभी इन खामोश आंखों को पढ़ने की कोशिश की थी क्या
आज मेरे जाने से आंसू बहा रहे हो
कभी दो पल मेरे साथ रहने की कोशिश की थी क्या

जो मुझे तुम्हारी जरूरत थी
तो तुम में से कोई नहीं था
मेरी तरह तुम्हारी भी कोई बेबसी थी क्या
तुम में से हर कोई मेरा कातिल है
तुम्हारे हिसाब से यह खुदकुशी थी क्या
देखो मेरा दर्द जानना है तुम दीवारों से पूछो
जिन से लिपट कर खुद को मैं हर रोज कोसता था
मेरे जाने की वजह पूछनी है
तुम तारों से पूछो जिन्हें छुप-छुपकर मैं हर रोज देखता था
तुम तो बस कहने भर को मेरे साथ थे
बाकी बातें तो मैं नहीं दीवारों से करता था
ख्वाहिशें पूरी तो मेरी एक भी नहीं हुई
मगर ख्वाहिश है मैं हजारों की करता था

तुम चाहते तो आवाज दे सकते थे
मेरी तरह तुम्हारे होठों पर भी खामोशी थी क्या
तुममेसे हर कोई मेरा कातिल है
तुम्हारे हिसाब से यह खुदकुशी थी क्या
जब जीते जी साथ नहीं थे
तो मेरे मरने पर तुम सबका मेरा हमदर्द बन्ना भी जरूरी नहीं था
क्योंकि जब मुझे जरूरत थी
तो मेरे साथ तुम में से कोई नहीं था
मेरा मुस्कुराता हुआ चेहरा तो तुम्हें दिख जाता था
मगर इसके पीछे छुपा दर्द तुम में से किसी को दिखा ही नहीं

अब वो दीवारें तो पढ़ नहीं पाती ना
शायद इसलिए आखिरी खत भी मैंने लिखा ही नहीं
आज मारा हूं कल भूल जाओगे
यह मतलब का प्यार तुम सब रहने दो
जीते जी ना सही कम से कम मरने के बाद तो मुझे जीने दो
तुम मेरा दर्द समझते भी तो कैसे
कभी तुम्हारे दिल में दर्द
और चेहरे पर हंसी थी क्या
तुम में से हर कोई मेरा कातिल है
तुम्हारे हिसाब से यह खुशी थी क्या

दिखाता तो नहीं था मगर हां एक दर्द मुझ में भी शामिल था
हर किरदार निभाया मैंने जिंदगी में
मगर यह जिंदगी का किरदार थोड़ा मुश्किल था
मैं जिंदगी से नहीं कुछ लोगों से हार गया
अब मैं अकेला तो उन सब से लड़ नहीं सकता था
मेरी ख्वाहिशों की लिस्ट थोड़ी सी लंबी थी
मैं यूं ही बेवजह तो मर नहीं सकता था
कुछ बातें संभाल कर रखी थी
जो मुझे जमाने से चीख चीख कर कहना था

छोटे शहर से जरूर था
मगर मुझे तुम सब के दिल में रहना था
चलो जीते जी ना सही देखना यह है
मरने के बाद किसके दिल में आता हूं
आज मां की बहुत याद आ रही है
चलो आज थोड़ा मां से मिलकर आता हूं
कहने को कुछ लोग मेरे साथ तो थे
मगर उनमें कोई बात मेरी मां जैसी थी क्या
तुम में से हर कोई मेरा कातिल है
तुम्हारे हिसाब से यह खुदकुशी थी क्या
                                    – Amritesh Jha

Post a Comment

If you have any doubts, please let me know.

Previous Post Next Post